मासूम मोह्ब्बत

वो मासूम मोह्ब्बत जो आंखों में रहा करती है,

चुप सी रहती है पर बातें बहुत कहना चाहती है।।

 

थाम कर एक दूजें का हाथ वो चलने को कहती है,

कुछ दूर ही रहती है क्योंकि पास आने से वो थोड़ा डरती है।।

 

सपनों में जहां बसा कर अपना उन सपनों में वो खोई रहती है,

जीवन की भारी दोपहरी में भी वो सोयी सी रहती है।।

 

रेत के घरोंदे बना कर उस समंदर से यही वो कहती है,

लहरों को दूर रखना अपनी, इन नाज़ुक घरोंदों में उम्मीद मेरी कहीं रहती है।।

 

ख़ामोशी की जुबां पर उसने माहरत भी हासिल कर ली है,

शब्दों के परे अहसासों की दौलत भी हासिल कर ली है।।

 

उस पत्थर से दिल लगा कर उस पत्थर में भी दिल डाल दिया,

दिल की गहराइयों में क़ैद उस बच्चे को जीवन की बेड़ियों से फ़िर छुड़ा दिया।।

 

सुबह की आस लगा कर रातों को बेफ़िक्र सपनों में डूबीं रहती है,

ठंडी हवा के झोंके जैसे पर्वतों के आग़ोश में लिपटे रहते है।।

 

कागज़ की कश्ती को उसने जीवन के भवसागर में उतार दिया,

मुस्कराहट से उन लहरों में उठते तूफ़ान को दबा दिया।।

 

जग जीत कर बैठा था वो शिखर पर फ़िर भी अंदर से खाली था,

हारकर अपने दिल को उसने भीतर का ख़ालीपन भी दूर किया।।

 

वो मासूम मोह्ब्बत जो आंखों में रहा करती है,

चुप सी रहती है पर बातें बहुत कहना चाहती है।।

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ख़र्च होती ज़िन्दगी

गुज़रते वक़्त के साथ यूँ खर्च होती ज़िन्दगी, मानो लगी हो आग तेल के कुऐं में कहीं,

फ़र्क तो बस इतना है कि यहाँ धुआं दिखाई नही देता।।

वो बहुत सिसकती हैं और बिलख बिलख कर ख़ूब रोती है,

फर्क़ तो बस इतना है कि उस की आवाज़ किसी को सुनाई नही देती।।

मुस्कराहटें अक्सर चेहरें को छिपा दिया करती है,

मग़र उन मुस्कराहटों के पीछे का दर्द किसी को दिखाई नहीं देता।।

लाखों राज़ यूँही दफ़न रहते है उस ज़ेहन के भीतर,

उस सीने पर पड़ा बोझ क़भी किसी को दिखाई नही देता।।

महलों में रहनेवाले बदस्तूर चकाचोंध से अंधे हुए रहते हैं,

दिलों में दूरियाँ हैं इतनी कि एक दुजें की आवाज़ भी वहां सुनाई नही देती।।

यूँही वक़्त के साथ ख़र्च कर देते हैं हम ज़िन्दगी,

फर्क़ तो बस इतना हैं कि हमारी कुछ कमाई नही होती।।

नारी

तेरे होने पर अहसास होता है जीवन का,

तू न होती तो इस धरा पर जीवन का होना ना मुमकिन होता।।

तेरी गोद मे पल कर बड़े हुए, तेरी उंगली थाम कर चलना सीखा सबने,

तू ना होती तो यूँ बेफ़िक्र जीना ना मुमकिन होता।।

इस कलाई को सजाया तूने, झूठ बोल कर ना जाने कितनी बार बचाया तूने,

तू ना होती तो यूँ खुद से लड़पाना ना मुमकिन होता।।

बचपन में साथ निभाया तूने, दोस्त बन कर खूब हंसाया तूने,

तू ना होती तो यूँ ख़ुशी से जी पाना ना मुमकिन होता।।

तू माँ है, तू ही है भगिनी, तू दोस्त है, तू ही प्रेमिका है, तू है जगत जननी और अंतकाल तू ही है विध्वंसिनी।।

तेरे होने पर ही अहसास होता है जीवन का,

तू ना होती तो इस धरा पर जीवन का होना ना मुमकिन होता।।

इंतज़ार

इस शाम को इंतज़ार तेरा आज भी है, उन गलियों को तुझ से प्यार आज भी है,

मानता है जिन्हें तू बेगाना उन बेगानों को तुझ से प्यार आज भी है।।

 

वक़्त की गुत्थियां सुलझाने में माना तू बहुत है उलझ गया,

पर उस ख़ाली घर को तेरे आने की आस आज भी है।।

 

चंद कागज़ो की दौड़ में तू भूल बैठा जिस ममता के आँचल को,

तेरी उस बूढ़ी माँ को तेरे घर आने की आस आज भी है।।

 

ना जाने किस मृगतृष्णा से तू यूँ व्यथित हो रहा,

ख़ुद को तो तूने खो दिया अब संबंधों को भी बेवज़ह खो रहा।।

 

ये चेहरे की झुर्रियाँ और वो बढ़ती उम्र आईना नहीं तेरे तज़ुर्बे का,

उन पथराई आंखों में किसी मंज़िल का इंतज़ार आज भी है।।

 

उस अनजाने जहां की तलाश में बहुत दूर ले आया है तू कश्ती अपनी,

क्यों भूल बैठा है तू इस बात को कि उन बंज़र किनारो को तेरा इंतज़ार आज भी है।।

 

बहुत गुमां है तुझे तेरी हस्ती पर जब से इस जहां का बादशाह तू बन बैठा,

वो ख़ुदा ना भुला है तुझे पल भर को, बस तेरी एक अरदास की आस उसे आज भी है।।

 

छोड़ आया था जिस मोह्ब्बत को तू उन गलियों में सदियों पहले,

उस मासूम मोह्ब्बत को तेरी एक नज़र का इंतज़ार आज भी है।।

 

इस शाम को इंतज़ार तेरा आज भी है, उन गलियों को तुझ से प्यार आज भी है,

मानता है जिन्हें तू बेगाना उन बेगानों को तुझ से प्यार आज भी है।।

Freedom

If it takes a date to make you realize of your freedom then you are not free.

If it takes sacrifice to sustain your freedom then you are not free.

You are not free if it takes others to take a stand for you.

If you are able to embrace thy wind with open arms then you are free.

If you have your heart filled with love and joy then you are free.

If you are able to laugh unconditionally then you are free.

If you celebrate life daily then you are free.

Freedom is not a date or an occasion, it’s the celebration of life every single day.

Celebrate life celebrate freedom.

दौड़

जंग रोटी की कब दौड़ नोटों की बन गई तुझे पता भी ना चला,

ये ज़िन्दगी तो सपनो की थी कब मंज़िलो की बन गई तुझे पता भी ना चला।।

 

यूँ तो ख्वाबो की होली जलाते कितनो को देखा है हमने, कब ये तेरी फितरत ही बन गई तुझे पता भी ना चला,

ज़िन्दगी मिली थी तुझे मुस्कराने के लिए कब ये तेरी उदासी बन गई तुझे पता भी ना चला।।

 

यारो की भीड़ बढ़ते बढ़ते कब दुश्मनों की बन गई तुझे पता भी ना चला,

मोह्ब्बत वो तुझ से दूर होते होते कब बेगानी हो गई तुझे पता भी ना चला।।

 

इस ज़िन्दगी के सफर में कब तेरी मंज़िल तुझ से बिछड़ गई तुझे पता भी ना चला,

कहानी जो प्यार से शुरू हुई कब तक़रार में बदल गई तुझे पता भी ना चला।।

 

तराना ज़िन्दगी का यूँ बेसुरा राग हुआ जिस का अंदाज़ा तुझे ना जाने कितने सालो बाद हुआ,

जवानी को फूँक कर बुढ़ापा जब तेरे साथ हुआ, तब जा कर तुझे अपने सूनेपन का अहसास हुआ।।

 

निन्यानवें के फ़ेर में ना जाने कब तेरा घर ही तुझ से बेज़ार हुआ,

कौड़ियाँ बटोरता रहा तःउम्र और यूँही जीवन तेरा बेकार हुआ।।

 

छोड़ कर वो प्यार का आँचल तूने उम्मीद करी कि आग ठंडक दे तो क़ुसूर तो तेरा था,

छोड़ कर वो आंगन अपना सोचा कि वो वीरानियाँ तुझे राहत दें तो क़ुसूर तो तेरा था।।

 

कब तेरी गलतियाँ तेरा ही हिज़ाब बन गई तुझे पता भी ना चला,

मौसम के बदलते रंग के जैसे कब तेरी फ़ितरत बदल गई तुझे पता भी ना चला।।

 

जंग रोटी की कब दौड़ नोटों की बन गई तुझे पता भी ना चला,

ये ज़िन्दगी तो सपनो की थी कब मंज़िलो की बन गई तुझे पता भी ना चला।।

Starry Night

When I walk on the road in a starry night,

Still there’s a darkness which lie hidden inside.

 

That shinning smile I still carry in my heart,

It still feels the same though it has been years since we are apart.

 

The chill of the wind shakes thy spine,

The memories are still afresh when you were all mine.

 

That shore still holds those immortal footprints,

Those moments of love went by in a blink.

 

I still miss those fingers entangled in thy hair strands,

Those eyes with oceanic depth and no end.

 

How can I forget thy majestic kiss,

which sucked all sorrows and gave thy sensual bliss.

 

The life has spun like the roulette wheel,

We still carry those wounds which will perhaps never heal.

 

We often walk thy forsaken ground,

But how hard you try doesn’t matter as it’s never going to come around.

 

Nobody knows but its the writer’s curse,

The words he pen down will never come out of those verse.

 

In the world of thought he might get the queen,

But in the real world he would just never win.

 

When I walk on the road in a starry night.