तेरा साया

​मैं तेरा साया यूँ बन के रहूंगा, साथ तो दूँगा मगर कुछ ना कहुगा। मैं तेरा साया यूँही बन के रहुगा।।


तन्हाई में कभी जब रोया करोगे, उन अश्कों को मैं पोंछा करुगा, साथ तो दूँगा मगर कुछ ना कहुगा। मैं तेरा साया यूँही बन के रहुगा।।


मंज़धारो में तेरी जब कश्ती फसेंगी, मैं साहिल तक उसे पहुँचा दूँगा, साथ तो दूँगा मगर कुछ ना कहुगा। मैं तेरा साया यूँही बन के रहुगा।।


कांटो से कभी वो राहे भरी तो, पलकों पर तुम्हें बैठा कर चलूंगा, साथ तो दूँगा मगर कुछ ना कहुगा। मैं तेरा साया यूँही बन के रहुगा।।


मोहब्बत को कभी तुम तरसे अगर तो, बाहें खोल कर सब न्यौछावर दूँगा, साथ तो दूँगा मगर कुछ ना कहुगा। मैं तेरा साया यूँही बन के रहुगा।।


जीवन में कभी तुम हार गए तो, उस हार पर मेरी जीत मैं भी वार दूँगा,साथ तो दूँगा मगर कुछ ना कहुगा। मैं तेरा साया यूँही बन के रहुगा।।


अँधेरे से तुम अगर घिर गए तो, दीए जैसे तेरे घर को यूँ मैं रोशन करुगा, साथ तो दूँगा मगर बस चुप ही रहुगा। मैं तेरा साया यूँही बन के रहुगा।।


कागज़ पर तेरी तस्वीर बना कर, तुझे पाने की चाहत को मैं भुला ही दूँगा, साथ तो दूँगा मगर कुछ ना कहुगा। मैं तेरा साया यूँही बन के रहुगा।।


दुनिया तेरी जब रोशन हुई तो, साये सा मैं भी छिप कर रहुगा। बेरंग कभी तेरी तुझे ज़िन्दगी लगी तो, इंद्रधनुष से में रंग मांग लूँगा।।


मैं तेरा साया यूँ बन के रहुगा, साथ तो दूँगा मगर कुछ ना कहुगा। मैं तेरा साया यूँही बन के रहुगा।।

Close My Eyes

I close my eyes I see your face, they are the memories that I cant erase.

The moment of truth hit out off the blue, I can see nothing but only you.

The puppet of life turns alive, the second it sees your tender smile.

The life used to be ain’t no fun, the moment i got you it all began.

The trauma of darkness shed no tear, its the thing that now none fear.

I sing now the song of full moon night and hope for the sun to shine too bright.

The moment I caught hold of your hand and those fingers rolled through your hair strands.

The dream of the life came true, I can see nothing but only you.

The thunderous sky danced with all its might, it was the moment when we grooved all night.

It then rained like cat and mouse, drenching us both inside out.

It was a dream of which one could never get out, years went by but the memories never phased out.

I close my eyes I see your face, they are the memories that I cant erase.

काश कभी ऐसा हो जाए

ऐ काश कभी ऐसा हो जाए, इन रास्तो पर कभी वो मिल जाए,

बाते उस से हज़ार पूछ लूँ मैं, उन चंद लम्हो में ज़िन्दगी जी लूँ मैं,

बीते वक़्त का हिसाब लूँगा उन गुजरे लम्हो को एक बार फिर से जी लूँगा,

ऐ काश कभी ऐसा हो जाए, इन रास्तो पर कभी वो मिल जाए।।


उन छुटे हाथो को फिर से थाम लूंगा, जो टूट गए थे धागे उन्हें फिर से बाँध लूँगा,

बिरह की रातों से मैं सवाल करुगा, उन टूटे हुए तारो का मैं हिसाब लूँगा।


शब्दो में बांध कर एक कहानी बना दूँगा, उन अनकही बातो की ज़िंदगानी बना दूँगा,

श्यामल आँखों में जो उमड़ती हैं लहरे, उन लहरो पर ख्वाबो की कश्ती उतार दूँगा।


सन्नाटे में जो शोर यूँ सुनाई देता है मुझे, उस शोर की वजह में कभी तो पहचान लूँगा,

जिस दरख्त की छांव तले गुजरते थे दिन अक्सर, उस दरख्त के सूखने की वजह मैं एक दिन ढूंढ लूँगा।


रेत पर बने उन कदमो के निशां जो समंदर में कही खो गए हैं, उन बिखरी लहरो के बीच उन्हें भी किसी दिन में ढूंढ ही लूँगा,

उन मिटी हाथो की लकीरों पर क्या पता किसी दिन तेरा नाम उतार ही दूँगा।


खुद पर भरोसा है इतना हमें कि किसी दिन ज़रूर उस खुदा को मेरे सामने ला ही दूँगा,

ऐ काश कभी ऐसा हो जाए, इन रास्तो पर वो मिल जाए,

एक मौका हमें भी मिल जाए, तो हम भी पल में सदियां जी जाएँ।


ऐ काश कभी ऐसा हो जाए।।

The War of Perspectives

Now a days it seems that world is virtually at war as there are scenes of unrest and violence here and there. It seems that world has lost the sense of harmony and love. The whole logic of inception of this world has been defied the moment we started to gain intelligence. It has always been a place of different thoughts and faiths but off late we have failed to realize this simple fact.

Despite being endowed with a very functional brain we as humans have failed to keep up with the real spirit of this world. There are wars and clashes only because of difference in our thoughts and perspectives. It’s not the people who are fighting here its their different faiths and perspectives that are causing such bloodshed. The real meaning of being human is somewhere lost between these fights of proving oneself superior to other. We all talk of equality but in there in our hearts every one is partial. Leave equality, the justice which we often boast of is a meager representation of one’s perspective of justice. So even justice is not justified always.

A lot of damage has already been done but still there are few who are still carrying the baton of peace. We must realize our mistakes and correct them before the conditions get worse. Slight change in approach can do a lot of good. The day we are able to accommodate different perspectives in this world together we will only move in one direction of growth. Let us unite and be one again and make the world same as it was once before.

​वो स्याह रात

वो स्याह रात में, वक़्त थम गया उस छोटी सी मुलाक़ात में, चाँदनी के आगोश में सिमट गई वो रात बस, एक छोटी सी याद में।


समंदर की लहरो में, उन गुज़रते हुए पहरों में, कहीं खो गई वो बात तेरी मेरी भीड़ भरे गैरों में,

उन भिनि भिनि यादो की वो प्यार भरी सौगात कही बिख़र गई उन अनजानी राहो में।

डूब कर उन आँखों की गहराई में भूल गया तू भी था कभी तन्हाई में,

उन भूली बिसरी बातो में उन काली सावन की रातों में वो चली छोड़ तुझे फिर उन बेगाने हाथो में।

तेरा दिल बंजारा रहा किया, यूँ खुद का सौदा तूने लाख किया,

फिर भी अधूरा रह गया वो ख्वाब जो देखा था तूने उन बिरहा की रातों में।

तेरे सपनो का घर भी उजड़ गया, जो सब समेटा था वही बिखर गया,

वो रात का मंज़र बदल गया जब वो धुप का मौसम खिल गया।


वो स्याह रात में, वक़्त थम गया उस छोटी सी मुलाक़ात में, चाँदनी के आगोश में सिमट गई वो रात, बस एक छोटी सी याद में।


होंटो पर अधूरी रह गई वो बात जो करनी थी मुझे तेरे साथ में।।

Being Helpless

We define our life by the choices that we have made over a period of time. Some choices are logical some are not but what ever we choose it surely have its lasting effects on our lives. People are often being taught to be logically correct and that logic is always dependent on the understanding of those who have drawn a line between logical and illogical. Some where in between all this we fail to realize that we have lost the choice of choosing and we end up with only a few options while neglecting the other ones.

There is an astound fear of loosing which keeps us away from amending our decisions. We care too much about rest of the world before taking any decision. At times it happens that our choices are not right and we must always remember that mistakes can always be corrected. We as humans are bound to make mistakes that’s the only way we learn about life. A man is not only defined by the choices he has made but also by how soon he has corrected his bad choices. There is no point being victim of your own choices because there’s always a way that you can correct them. Even a murderer gets peace once he accept his crime and repent for the same. We must not be scared to admit the mistake and correct it as there is always a choice in life. Being suppressed by our own mistakes is the worst that we can treat ourselves. People often feel helpless and seek approval of others while making any decision. Though we often fail to realize the fact that one can see as far as one can think, its only a matter of perception. So those who disapprove of you might not see as far as you can. So no point seeking approval its only about following your instincts and correcting ones mistakes.

There will always be second thoughts and different opinions but its on you to choose. Following ones heart and making his own choices doesn’t makes him a rebel but its the only way to learn about life. We have to understand that we are social animal but we live an individual life. There are no rights and wrongs its just perspectives. Stop being victimized by your own choices and shift the moment you feel that you have made a wrong one. Being called a rebel is far better than being helpless and lonely.

खुदा

ऐ खुदा तू क्यों है मुझ से इतना जुदा, तेरी तलाश में मैं सदियों से यूँही फिरता रहा।

तेरे साये में मैं उम्र भर जिया किया, फिर भी तुझे पाने की ख्वाहिश में यूँही मैं करता रहा।

पर्वत, नदियां, सागर, झरने सब से ये ज़िरह में करता रहा,  कि भूले भटके से कोई मुझे बता दे तेरा जो है पता।

हर पल तेरा सज़दा किया, नींदों में भी तेरा नाम लिया, मंदिर, मस्ज़िद, खंडहर, जंगल हर जगह तुझे मैं ढूंढा किया।

मेरा समंदर भी मेरे अंदर है, ये बवंडर भी मेरे अंदर है, फिर भी उस तूफ़ान को दबाने को मैंने तेरे नाम का ही सहारा लिया।

तेरी ख़ोज में मैं मीलो गया, उस तलाश में ही यूँ खो गया, एक सवाल रहा मेरे ज़ेहन में कि क्यों दूर तू मुझसे होता रहा।

तेरी यादों में मैं खोया रहा, मैं जागता रहा और तू सोया रहा, ऐ खुदा क्या तू कभी मेरे पास था या सिर्फ मेरा वहम ही दूर होता गया।

ये हिज़्र का हाथ ही मानो ख़ंजर हो गया, जिस दिन मैं तुझ से और तू मुझ से जुदा हो गया,क्यों भूल गया उस वक़्त को तू ?माना की तू आज खुदा हो गया।

मेरे हाथो की लकीरों में मैंने तुझे ही पाया है, तू क्या मुझ से जुदा हो पाएगा क्यूंकि तू ही मेरा सरमाया है।

भूल गया वक़्त के साथ तू मेरा ठिकाना, ना जाने क्यों में तुझे यहाँ वहां ढूंढता रहा।

ऐ खुदा तू क्यों है मुझ से इतना जुदा, तेरी तलाश में मैं सदियों से यूँही फिरता रहा।|