देखा है

कागज़ पर बनी लकीरो को मिटते देखा है, हमने बनती तकदीरों को बिगड़ते देखा है,

आँखे संभाल कर बंद करना ऐ दोस्त, हमने बंद आँखों में सपनो को बिखरते देखा है।



मौसम को पल में बदलते देखा है, साफ़ आसमां को बादलो से घिरते देखा है,
पाँव ज़मीन पर ही रखना तू, हमने ख्वाबो को तुफानो में उड़ाते हुए भी देखा है।


सोने को यूँही माटी होते देखा हमने, महलो को खंडार होते भी देखा है,

अपनी औकात ना भूलना ऐ मेरे दोस्त, हमने शौहरत को ख़ाक में मिलते देखा हैं।


मयखाने को भी खाली देखा हमने, खुबसूरती को भी सरेआम बिकते हमने देखा है,

हाथ थाम के रखना सब के तू, लाखो की भीड़ में हमने अपनो को भी बिछड़ते देखा है।


धरती को बंज़र होते देखा है, इस दुनिया में मुर्दो को भी जिंदा होते देखा हैं,

वक़्त का सही हिसाब रखना ऐ मेरे दोस्त, हमने पल में सदियों को गुज़रते हुए देखा है।


इस रंग बदलती दुनिया में कई बेरंग चेहरों को देखा है, मुस्कराते चेहरों पर से नक़ाब को भी उत्तरते देखा है।

ऐतबार देख कर करना तू, हमने यूँही भरोसे को भी टूटते देखा है।


मोहब्बत भी जी भर कर के देखी हमने, उस मोहब्बत को बिछड़ते भी देखा है।

साथी सोच कर चुनना ऐ मेरे दोस्त, हमने अक्सर उन को राहो में बदलते हुए देखा है।

कागज़ पर बनी लकीरो को मिटते देखा है, हमने बनती तकदीरों को बिगड़ते देखा है।।

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