बात

आज चलो कुछ बात करते हैं, उस बीते वक़्त को थोड़ा याद करते है।

उस पुरानी मोहब्बत के साथ चलते है, कुछ मेरे गुनाहों का हिसाब करते है।

चलो आज कुछ बात करते है।।


ज़िन्दगी की राहों पर कुछ दूर चलते हैं, हाथ थाम कर एक दूजे की आँखों में खो जाते है।

आज हर शिकायत भुला देते है, कोई नई एक शरुआत करते है।

चलो आज कुछ बात करते है।।


उस बूढ़े दरख्त के पास चलते है, छाव में उस की आज फिर थोड़ा आराम करते है।

भुला कर बैर सारा, उस खुदा से आज फिर कोई अलग फ़रियाद करते है।

चलो आज कुछ बात करते है।।



सावन की काली रातो में थोड़ा चांदनी को याद करते है, उस रूठे यार को आज मनाने की बात करते है।

चलो आज कुछ बात करते है।।


बैरकाशी भुला कर थोड़ा प्यार करते है, बिखरे ख्वाब संजो कर आज फिर एक दुनिया तैयार करते है।

चलो आज कुछ बात करते है।।


ज़िन्दगी से छुट्टी ले कर एक माटी का घरोंदा तैयार करते है, जो उड़ गए परिंदे शाख से फिर उन को आवाज देते है।

चलो आज कुछ बात करते है।।


उन अनजानी राहो पर आज थोड़ा फिर साथ चलते है,

हाथ थाम एक दूजे का फिर गुज़री मोहब्बत को याद करते है।

चलो आज फिर कुछ बात करते है।।


दौड़ते दौड़ते थक गया हूं चलो अब तोडा आराम करते है,

जीवन की आपा धापी से कही दूर ज़िन्दगी तमाम करते है।

चलो आज कुछ बात करते है, एक नई शुरुआत करते है।।


HE

Dreams of the dark in the brightest of the days,

Its the silence that haunts in the noisiest of ways.

Emptiness of the ocean that kills thy heart,

Its the fear of fearless that makes him afraid.

Its the magic of slumber to the beauty of which he surrender,

Clear blue sky turns black in the sight its the thunder that breaks a fight.

Too many thoughts clogged thy mind, hardly left a place where he can hide.

Unsaid words and half written poetries, all he was surrounded by too many secret stories.

With a calm face he fought every situation with grace,

But inside thy heart he held a volcano which was ready to tear him apart.

The fire inside burned so bright, everything turned to ash whatever he was trying to hide.

Silence of world murdered those chirrpy thoughts, all he could do is to carry them across in his boat.

The plans of future went haywire in a moment, its the tornado of life that created such torment.

Dreams of the dark in the brightest of the days,

Its the silence that haunts in the noisiest of ways.

सुबह

वो कोहरे में सिमटी सुबह की लाली, वो ओस की बूंदे जमी घांस पर थी।

भूल कर बैठे थे गर्मी का वो आलम सब, वो भाप भी शर्मा के उठती उस चाय की प्याली से थी।।


भूख भी क्या थी ना जाने उन की आँखों में, वो सब्र का मोती भी पत्थर सा हुआ जाता।

उस अंगड़ाई की नरमाई में हलकी नींद का होना, मानो फूल पर जैसे ठहरी बरखा की बूंदे हो।।



गुज़री रात की बातें अब भी ज़ेहन में ठहरी थी, अल्फाज़ो के शोर में चिडियों की चहचहाट थी।

उन अधखुली पलकों पर वो सपनो का बसेरा था, मानो हर किरण कोई धुन जीवन का गाती हो।।


सांसो की गर्माहट हवाएं यूँ चुरा लेती, मानो प्यार का मोती समंदर में डूब सा जाता।

वो थाम कर हाथ को मेरे तेरा बातो में खो जाना, मानो बादलो में कहीं चाँद वो छिपता  चला जाता।।


भूल सब बैठी तू सब उन ख्वाबो की दुनिया में, उस कल्पना की गहराई में असलियत का यूँ खो जाना।

उस कोहरे के छटने पर वो फैला धुप का आलम, उस पर भी तेरी जुल्फों का घटा सा बिखर जाना।।


वो कोहरे में सिमटी सुबह की लाली, वो ओस की बूंदे जमी घांस पर थी।

वो सर्द सुबह की यादें भी ना कभी भूल भी पाना, उस ठिठुरन की चादर में ज़िन्दगी का सिमट जाना।।

जीवन

रात के सन्नाटे में रूह की आवाज सुनाई देती है,

गौर से देखो तो हर ज़िन्दगी के पीछे कई सिसकियाँ सुनाई देती है।।


दौड़ भाग की दुनिया में किसी को भी न चैन मय्यसर होता है, खुद को लोग खो देते है यहाँ अक्सर ऐसा होता है।।


जंगल में रहने वाले अब दीवारों में बंद रहते है, शिकारी शेर भी आज यहाँ बोटियों पर पलते है।।


बढ़ते बढ़ते सबने एक दूजे से कटना सीख लिया, आँखों को पढ़ना छोड़ सबने अक्षरों को पढ़ना सीख लिया।।


सपने अपने बेच बेच कर तूने नोटों का अंबार लगाया, वक़्त पड़ी तो तनहा था तू वो ढेर तेरे किसी काम ना आया।।


ख्वाहिशो के समंदर में यूँ डूबते सब जाते हैं, ज़रूरतों को पूरा करते बहुत कम ही लोग नज़र आते हैं।।


पत्थरो के संसार में तू खुद भी पत्थर हो गया, कुछ तुझ से दूर हो गए कुछ से तू खुद ही दूर हो गया।।


तोड़ दे उस बंधन को जो तुझे खुद से दूर खिंच रहा, चल पड़ उन रहो पर जिन के सपने तू बचपन से था बुन रहा।।


ये जीवन दो धारी तलवार है, कही जीत कही हार है, वक़्त रहते जान ले तू कि इस खेल में जीवित रहने की आस लगाना ही बेकार है।।


यहाँ अक्सर ऐसा होता है कोई कुछ पता तो कोई खोता है, खोने पाने के खेल में ही सारा वक़्त यूँही गुज़रता है।।


इस दौड़ भाग की दुनिया में किसी को भी चैन न मय्यसर होता है।।

Depression

In this era of competition, success and failures there exists a race of people who have not been able to make a stand of their own on those particular parameters. The people who have faced more failures than success, who have fallen more than anybody else in the world. At times this constant failure and rejection pushes them in dungeons of darkness with a little or no hope. A sense of hopelessness and denial haunts them which leads to the state of depression.

Life is not a fairy tale for all of us, at times it gets hard for no reasons for some of us. It depends on one how he faces the tough scenarios. Some give up without fighting and some fight too hard to sustain. But at times constant failures and fighting for a prolonged period can leave one drained of energy. This drained energy phase is followed up by an emptiness within, which is the worst state for one to be in. Even the most die-hard men get blank when that phase of emptiness hits them. It’s natural to be depressed and feel bad about somethings but when this phase sustains for a longer period it turns into depression. When we try to dig deeper for the reason behind depression we find that its often the scenarios that are being created by one’s own mind. As we often say that the biggest devil on earth is human mind as it can create a world of its own thus we have to learn how to control it. But at times the situations outside tends to affect us so much that giving up seems to be an easier option. The ratings of people on the scale of success and failures has been the root cause of people being depressed.

We often fail to realize our actual state because we are less connected to ourselves now a days. While competing in this world at times we get too hard on ourselves while pushing too hard to reach to the top and when the efforts go in vain it leave us all drained and disappointed. It is OK to be depressed at times as one can not be happy always but it takes a lot to beat that feeling and to recover oneself from there. It is easy succumb to the darkness but its tough to rise from it. Clarity of thoughts and vision will help to beat the miseries of life. The state of depression can only be fought with determination and hope. Its perfectly fine to be depressed but its not fine to be hopeless.

इश्क़

​ये इश्क़ भी क्या चीज़ है जो बदल देती है इंसान को,

किसी को तो बेहतर इसने किया कही किसी का मंज़र ही बदल दिया।।


दस्तूर है इस दुनिया का कि इसने कभी इश्क़ को ना क़ुबूल किया, ग़ालिब भी कहते कहते यूँ मर गया कि निकम्मा उसे इस इश्क़ ने ही था किया।।


उस दिल के समंदर को ख्वाबो से जिसने था भर दिया, वो इश्क़ ही था जिसने उस सूने से घर को था चहका दिया।


ये फितरत है तेरी जो अपनो को तूने यूँही ठुकरा दिया, ये तो इश्क़ ही था जिसने अपनो को बिछड़ने से बचा लिया।।


ये इलाइची सी ज़िन्दगी है जो पिसती जीतनी उतनी ही महकती है, जो फ़साना तेरा मेरा है उस का सन्नाटा ही इश्क़ सा है।।


गुज़रती उम्र के साथ तज़ुर्बा यूँही बढ़ता रहा, मैं बदलता रहा ये ज़माना भी बदलता रहा, उस इश्क़ में थी कुछ बात  जो अफसाना यूँही बनता रहा।।


अल्फाज़ो में बाँध कर वो कहानी एक बनाती रही, ज़िन्दगी भी आग सी खुद ही धुक धुक जलती रही। 

भूल कर बैठा था जिस की याद में संसार को, वो उम्मीद भी आज तेरा दरवाज़ा खटखटाती रही।।


एक परछाई उस अन्धकार में हर पल जो तेरे साथ थी, वो इश्क़ ही था जिससे तूने सदियों से ना कही कोई बात थी।।


ये इश्क़ भी क्या चीज़ है यारो जो बदल देती है इंसान को।।

The Wall

It’s the story of a stony wall, which stood straight be it winter or fall.

Years went by in days and nights, it faced all but didn’t give up the fight.

It saw people sobbing all alone, supported them when they had no one to belong.

Though it was just a stony wall, but still had feelings more than anybody of us all.

It’s the story of a stony wall, which stood straight be it winter or fall.

 

It was the shelter when storm hit high, saved every one who came there to hide.

It never had a heart of its own, which helped it bridge the divide and treat everybody as one.

It saw lovers make out in its shade, when things got quite it smiled at their fate.

It’s the story of a stony wall, which stood straight be it winter or fall.

 

It saw people’s murderous rage, went short of words and could not think of a phrase.

It thanked the god for its tedious fate, felt good about itself for not having those human traits.

Being stationary did no good, as world moved around and it had swinging moods.

It’s the story of a stony wall, which stood straight be it winter or fall.

 

Earth trembled under and sky gave a thunder, cracks developed around and it was ready to surrender.

It was time to be free from all those misery, but still it held tight and never gave up the fight.

Things went to dust in a single strike, though it would always be remembered for its might.

It’s the story of a stony wall, which stood straight be it winter or fall.