ज़रूर हैं

तेरे ज़ेहन के हर सवाल का जवाब बेशक़ हो ना हो,

मग़र इस क़ायनात में तेरी एक जग़ह तो ज़रूर है।।

 

यूँ मायूस ना हो देख कर उन बिखरे ख्वाबों को तू,

ख्वाबों के बिखरने और संजोने के पीछे कोई मुनासिब वज़ह तो ज़रूर है।।

 

ठोकरों से टूट कर तू खड़ित तो मानो हो गया है,

पर भूल मत उस खंडन के पीछे तेरे कर्मों का हाथ तो कहीं ज़रूर है।।

 

माना कई हाथ छुटे हैं तेरे हाथों से इस जिंदगी की ज़द्दोज़हत में,

पर तेरे इस अकेलेपन की कोई मुनासिब वज़ह तो ज़रूर है।।

 

तू बेशक़ बादशाह बन बैठा इस जहां के तख्तोताज़ पर आज,

सब पा कर भी तेरे हाथ खाली होने की कोई वज़ह तो ज़रूर है।।

 

इस सूखी हवा में फैली तबस्सुम की महक है आज,

कहीं इस बंज़र ज़मी पर बरसात तो हुई ज़रूर है।।

 

इतनी फरियादों के बावज़ूद जब उस खुदा से तेरा सामना न हो पाया,

उस खुदा के पास तेरे रूबरू ना आने की कोई वाज़िब वज़ह तो ज़रूर है।।

 

वो मोहब्बत इतनी ग़हरी थी मग़र अपना मुक़ाम फ़िर भी ना पा सकी,

तेरे सपने मुकमल ना हो सकने के पीछे कोई छिपी वज़ह तो ज़रूर है।।

 

तेरे ज़ेहन के हर सवाल का जवाब बेशक़ हो ना हो,

मग़र इस क़ायनात में तेरी एक जग़ह तो ज़रूर है।।

Memories

I close my eyes I see thy face,

it’s those memories I find hard to erase.

The shackles of time might have tied my hands,

But there is a hope in my heart that I will meet you in the end.

The beauty of your eyes I can not forget,

Those memories are still afresh when my fingers played with those hair strands.

Those memorable days and sleepless nights,

Still I remember thy love which reached incomparable heights.

Your love was like that soothing wind,

Which touched my soul and made my heart sing.

I Still remember those moments and everything,

That everyday which went by, I live daily in my dreams.

The time went cruel and did separated our paths,

Thy love got lost and we were set apart.

I could still see your eyes in the wake of the night,

I dreams of that love which once brought us to life.

I close my eyes I see thy face,

it’s those memories I find hard to erase.

अक़्सर

मैं अक़्सर तेरी परछाईं को खोजा करता हूँ धूप भरी राहों में,

मैं खोजा करता हूँ अक़्सर उन लम्हों को जो बिताएं थे हमने साथ में।।

 

फ़लसफ़ा उन भीगीं रातों का यूँ स्याह होगा हमें अंदाज़ ना था,

मैं अक़्सर खोजा करता हूँ उन गुज़री हुईं यादों में उन भूले हुए संवादों को।।

 

दिन बीते साल बीते और सदियाँ यूँही गुज़र गई मानो उन छोटी छोटी मुलाक़ातों में,

मैं अक़्सर ढूंढा करता हूँ बहाने तुझे पाने के उन बासी पुरानी यादों में।।

 

इन सावन की रातों में जब काले बादल घिरते हैं जब हल्की हल्की बूंदे वो दिल पर दस्तकें देती हैं,

मैं अक़्सर सोचा करता हूँ वो वज़ह की आज भी है तू कहीं क्यों इस सीने में।।

 

खेल खेल में मोह्ब्बत हुई और खेल खेल में वादें कई,

मैं अक्सर ढूंढा करता हूँ उन अधूरे सपनो को उन टूटे वादों के ढेरों में कहीं।।

 

अब तो नामुम्किन सा ही लगता हैं कि होगी इन राहों में अपनी मुलाक़ात कभी,

मैं अक़्सर सोचा करता हूँ कि वक़्त आया है करने का हिसाब मेरे गुनाहों का अभी।।

 

वो खिलखिलाहट सी तेरी आज भी इस ज़ेहन में कहीं बाकी हैं,

मैं आज भी खोजा करता हूँ इस भीड़ में ग़ुम हुऐ तेरे उस चेहरे को कभी कभी।।

 

मैं अक्सर खोजा करता हूँ आज भी उन गुज़रे हुए लम्हों को,

उन गुज़री हुई रातो को, वो तेरी आँखों में बसी उन अनकहीं बातों को।।

 

मैं अक्सर खोजा करता हूँ, मैं अक्सर खोजा करता हूँ।।

 

Wind

Its the sound of the wind that unwinds the souls,

When all are busy in the humdrum forgetting where they actually belongs.

 

Momentary pleasures keeps drawing us down,

Its the morning breeze that uplifts that spirits and make us its own.

 

There’s a memory that we all try to erase,

Hiding it deep down under and never let it phase.

 

The glory of those old days which is forgotten in this rat race,

Its the beauty of the singing wind that just finds the lost treasure case.

 

It doesn’t discriminate either black or white,

What it says in those ears is that keep going on and put up a fight.

 

We all seek redemption on our different ways,

Being too harsh on ourselves isn’t going to help in this blind chase.

 

Learn to let go the things you hold on,

Life is like the wind it must keep moving on.

 

Spread your arms and let it embrace,

Stop sparing with yourself as its you who will be losing in every case.

 

Its a kid’s dream and a poet’s delight,

Bring out your pen or sporting shoes and play with all your might.

 

We all have to eyes for the beauty of the world,

All it takes is an effort to open up and look beyond this random goose chase.

 

Its the sound of the wind that unwinds the souls,

When all are busy in the humdrum forgetting where they actually belongs.

Inspiration

As the words remain hidden in the quilt of heart, The moments of life went unnoticed like a missed dart.

The experiences turned thy hairs grey, Time slipped out of the hands like the hunter’s prey.

The years of search never seems to end, Left behind is an old fort with no one to defend.

Realization struck hard as the time went by, No inspiration in the heart or the person for whom he could cry.

The adventurous journey came to an instant halt, The box of sweet memories when opened taste nothing but salt.

The dreams of thy fairyland faded in blink of an eye, All he could see that inspiration slowly die.

Tender wind turned into a vicious storm, Created havoc in thy life and broke the will to go on.

He fought hard with all his might, waiting for skys to shower a little bit of light.

Like Jason held on to his faith in the darkest of nights, He yielded his sword during the times when there was none to stand for the right.

Out of the darkness their comes the light, Remains of those dreams gave birth to new inspiring nights.

As the words remain hidden in the quilt of heart, The moments of life went unnoticed like a missed dart.

सफ़र

सफ़र में बसर हो रही है जिंदगी, कहाँ वक़्त है कि दो पल चैन से कोई सांस भी ले सके।।
काश न गया होता वो बचपन हमारा, इस नरम कुर्सी से तो वो धूप ही अच्छी थी।।

 
ख्यालों के इस जहां में बिखरे है अरमान कई, कहाँ वक़्त है कि उन को उठा कर सीने में भी भर ले।।
काश वो वक़्त न गुज़रा होता, इस दुनिया की भीड़ से तो तेरी आँखों की गहराई ही अच्छी थी।।

 
इस जीवन की आपाधापी ने यूँ निगल लिया अरमानो को, बेतुकी इस दौड़ से हट कर कोई आराम करे तो बईमानी हैं।।
इन नोटों से भरे मोटे पेटों से तो वो दो रोटी की भूख कही अच्छी थी।।

 
सावन की काली रातें जो सुनातीं थी झिंगुर की तान कई, इन शहरों की चकाचोंध में ग़ुम आज तो इस ज़ेहन की आवाज़ हुई।।

बंद महलों में गुज़रती इन बिरह की रातों से तो उस बूढ़े दरख्त के तले हुई चंद लम्हों की गुफ़्तगू अच्छी थी।।

 
गुज़रती उम्र के साथ तज़ुर्बा तो बढ़ता गया पर कहीं छोड़ दिया अहसासों को उस बीते बचपन की गलियों में।।
इस मशगूल ज़िंदगानी से तो वो फ़ुरसत भरी जवानी अच्छी थी।।

 
सफ़र में बसर हो रही है जिंदगी, कहाँ वक़्त है कि दो पल चैन से कोई सांस भी ले सके।।
काश न गया होता वो बचपन हमारा, इस नरम कुर्सी से तो वो धूप ही अच्छी थी।।

ख्वाहिशें

मैं ख्वाहिशों का अम्बार लगता गया तू रेत सी हथेली से फिसलती गई, मैं वक़्त यूँही गवाता गया तू पानी सी बहती रही।।

ऐ मेरे मुसाफ़िर तू मिला मुझे बड़ी देर से, मैं सदियों इंतज़ार करता रहा, तू भी यहां वहां यूँही भटकता रहा।।

एक मुक़ाम की तलाश में सफर यूँ करता गया,मंज़िलों की तलाश में ज़िन्दगी से दूर होता गया।।

मुर्दो की इस बस्ती में मोहब्बत खोजता रहा, मिला तो कुछ भी नहीं बस अपना वज़ूद खोता गया।।

यूँ तो भूख मेरी बहुत है, आंखों में नींद भी कम नही, ढूंढता मैं रहा चैन को इस जहां में, पाया तो कुछ भी नही मैंने यहाँ, जो था हाथ मे उसे भी गवा मैंने यूँही दिया।।

भुला कर ज़रूरतों को अपनी मैं लग गया ना जाने किस खेल में, जंग तो बस दो रोटियों की थी ना जाने क्यों जग जीतने की ख्वाहिश मैं करने लगा।।

उन मासूम निगाहों में सपने तो बस माटी के घरोंदों के थे, क्यों महलों की ख्वाहिश कर के उन सपनों को हाथ से गवाया मैंने।।

खेल बचपन के बड़े ही अनोखे थे, कही वो कागज की कश्ती थी तो कही वो मिट्टी के खिलौने थे, जवानी की ख्वाहिश में उस बचपन को बेकार ही गवाया हमने।।

मैं ख्वाहिशों का अम्बार लगता गया तू रेत सी हथेली से फिसलती गई, मैं वक़्त यूँही गवाता गया तू पानी सी बहती रही।।